अब भारत में वाणिज्यिक वाहनों को हरित बनाने का समय आ गया है
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“पर्यावरण प्रदूषण एक लाइलाज बीमारी है। इसे केवल रोका जा सकता है” जैसा कि बैरी कॉमनर ने कहा था
गो ग्रीन स्वस्थ जीवन शैली का मंत्र है लेकिन इसके सामने एक बड़ी चुनौती है। आज पर्यावरण प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा ख़तरा बन गया है। हर गुजरते दिन के साथ यह समाज के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। जल, वायु और मिट्टी प्रदूषण, रासायनिक जोखिम, जलवायु परिवर्तन और पराबैंगनी विकिरण जैसे पर्यावरणीय कारक हमारे रोजमर्रा के जीवन में बड़ी संख्या में बीमारियों और चोटों का कारण बनते हैं।
पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक वाहन हैं। वाहनों से होने वाला वायु प्रदूषण आंखों में जलन, मतली, सिरदर्द और खांसी जैसी छोटी समस्याओं से लेकर हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों जैसी बड़ी समस्याओं तक का कारण बनता है। एक ओर तीव्र शहरीकरण भारतीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके परिणामस्वरूप वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी व्यापक रूप से बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 10 शहर विश्व के शीर्ष 20 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हैं।
दुनिया के शीर्ष 20 प्रदूषित शहरों में शामिल भारतीय शहर ग्वालियर, इलाहाबाद, पटना, रायपुर, दिल्ली, लुधियाना, कानपुर, खन्ना, फिरोजाबाद और लखनऊ हैं। वाहन प्रदूषण बाहरी वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है। अकुशल ईंधन दहन से वायुमंडलीय परिवर्तन के उत्पादों जैसे ओजोन, सल्फेट कण और प्राथमिक उत्सर्जन जैसे डीजल कालिख कण और सीसा का मिश्रण उत्पन्न होता है। विशेषकर, बच्चों को उनके अपरिपक्व श्वसन तंत्र के कारण हानिकारक प्रभावों का खामियाजा भुगतना पड़ता है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित देश है।
डब्ल्यूएचओ में जन स्वास्थ्य की प्रमुख मारिया नीरा कहती हैं, “ प्रदूषण के कारण कई देशों में जन स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति है। यह भयावह है, वैश्विक स्तर पर हमारे सामने आने वाली सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है, जिसके समाज पर भविष्य में भयानक परिणाम होंगे।”
केस स्टडी: दिल्ली का वायु प्रदूषण
यहां वाहनों की बढ़ती संख्या, फैक्ट्रियों से निकलने वाला कचरा पर्यावरण मंत्रालय के लिए चुनौती है। यह तो हममें से अधिकांश लोग जानते हैं कि दिल्ली की गिनती दुनिया के प्रमुख प्रदूषित शहरों में होती है। शहर में बढ़े हुए वायु प्रदूषण के परिणामस्वरूप एलर्जी, विकृतियाँ और जन्म दोष, विकास प्रतिबंध और बिगड़ा हुआ फेफड़े की कार्यक्षमता और अस्थमा के मामले सामने आए हैं। 2013 में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (सीएसई) और अमेरिका स्थित स्वास्थ्य प्रभाव संस्थान द्वारा जारी निष्कर्षों के अनुसार, भारत दुनिया में शीर्ष CO2 उत्सर्जकों में से एक है।
दिल्ली में कुल वायु प्रदूषण का 70% वाहनों से होने वाले प्रदूषण का परिणाम है। वाहन नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), पार्टिकुलेट मैटर (PM) और हाइड्रोकार्बन (HCs) उत्सर्जित करते हैं। ( रिपोर्ट में प्रकाशित, सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंसेज, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली, हौज खास )। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए, दिल्ली सरकार ने कुछ प्रायोगिक उपाय किए हैं, जैसे ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू करना और यातायात नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना बढ़ाना। वाहनों से होने वाला प्रदूषण तेजी से टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी फैल रहा है।
पुराने वाहनों को सड़क से हटाने, ईंधन की बेहतर आपूर्ति, वाणिज्यिक वाहनों के लिए सख्त उत्सर्जन मानदंड समय की मांग है। हमारी ओर से एक छोटा सा प्रयास समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। तो, क्या हम अपने सार्वजनिक, निजी और वाणिज्यिक वाहनों के लिए कुछ हरित विकल्प खोजने के लिए तैयार हैं?
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